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    डॉ. नवाज़ देवबन्दी के 3 चुनिंदा ग़ज़लें

    किसी शायर के लिए सब से बड़ा एजाज (कमाल) वो है, जब लोग उस शायर के क़लाम को सर आंखों पर बैठाएं।...

    बनूं मैं लहू

    जन्म के अधिकार से,आत्मा की पुकार से,बनूं मैं लहू, बनूं मैं लहू। पिता के दुलार से,मां की पिचकार से,बनूं...

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    तनवीर एक मुसाफ़िर !

    हर इश्क़ का एक वक्त़ होता है,और ये वक्त़ किताबों से इश्क करने का है। तु चल दम जब...

    मै कौन हूँ ?

    जहां में नाम कमाने निकला, एक नादान लोभी हूं मैंधैर्य की दुनिया का बनूं मैं शाह, ऐसी इच्छा रखने वाला प्राथी हूँ...

    बनूं मैं लहू

    जन्म के अधिकार से,आत्मा की पुकार से,बनूं मैं लहू, बनूं मैं लहू। पिता के दुलार से,मां की पिचकार से,बनूं...

    गुलाम

    तुम किस कदर गुलाम बनाना चाहते हो,हम जानते हैं।तुम सोने जैसी मिट्टी को बंजर बनाना चाहते हो, हम जानते हैं।

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