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मेरी माँ और किताबें






Meri Maa aur kitaaben





कभी कभी सोचता हूं

जैसे

मेरी माँ! मुझे माँ बोलना सिखाती है

ठीक वैसे ही

किताबें! माँ लिखना सिखाती है ।



Kabhi kabhi sochta hu

Jaise

Meri Maa! mujhe Maa bolna sikhaati hai

Thik waise hi

Kitaaben ! Maa likhna sikhaati hain




मेरे चेहरे की रेखाओं को

जैसे

मेरी माँ अनपढ़ होते हुए भी पढ़ लेती है

ठीक वैसे ही

किताबें! कुछ कहानियां सुना कर

अपने पन्नों की गोद में सुला लेती है ।



Mere chehre ki rekhaon ko jaise meri Maa anpadh hote hue bhi padh leti hai

Thik waise hi

kitaaben! Kuchh kahaniyaan suna kar

Apne pannon ko godh me sula leti hain




मैं चाहता हूं

जैसे

माँ को मैं माँ कहता हूं

ठीक वैसे ही

किताबें! माँ कही जानी चाहिए ।



Mai chahta hu jaise

Maa ko mai Maa kehta hu

Thik waise hi

Kitaaben! Maa kahi jani chahiye




Written by :- राहुल

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