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ग़ज़ल : कुछ कह रही है आपकी धड़कने...




 

Gazal : kuchh keh rhi hai aapkee dhadkan



अगर आप भी शायरी/गज़ल पढ़ने मे दिलचस्पी रखते है तो आज हम लाए है आपके लिए कुछ बेहतरीन गज़ल....!!





पहले तो अपने दिल की रज़ा जान जाइये
फिर जो निगाह-ए-यार कहे मान जाइये


Pahle to apne dil ki raza jaan jaeye
Fir jo Nigaah-e-yaar kahe maan jaeeye


पहले मिज़ाज-ए-राहगुज़र जान जाइये
फिर गर्द-ए-राह जो भी कहे मान जाइये


Pahle Mizaj-e-raahguzar jaan jaeye
Fir Gard-e-raah jo bhi kahe maan 
jaeeye


कुछ कह रही है आपके सीने की धड़कने
मेरी सुनें तो दिल का कहा मान जाइये


Kuchh keh rahi hai aapke sine ki dhadkanein
Mari sune to dil ka kaha maan jaeeye


इक धूप सी जमी है निगाहों के आस पास
ये आप हैं तो आप पे क़ुर्बान जाइये


Ik dhup si jami hai Nigahon ke aas paas
Ye aap hai to aap pe kurbaan jaeeye


शायद हुज़ूर से कोई निस्बत हमें भी हो
आँखों में झाँक कर हमें पहचान जाइये


Shayad Huzur se koi nisbat hame bhi ho
Aankhon me jhaank kar hame pahachaan jaeeye

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